29 अक्टूबर 2026 - करवा चौथ - करवा चौथ एक पारंपरिक हिंदू व्रत है जिसे मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति और परिवार के कल्याण, दीर्घायु और समृद्धि के लिए रखती हैं। सरल शब्दों में, यह प्रेम, प्रार्थना, आत्म-अनुशासन और प्रतिबद्धता का दिन है। उपवास महत्वपूर्ण है, लेकिन सनातन दृष्टिकोण से व्रत का गहरा उद्देश्य केवल "भोजन के बिना रहना" नहीं है। व्रत का अर्थ है एक पवित्र संकल्प लेना - एक निश्चित अवधि के लिए अपनी सामान्य इच्छाओं को नियंत्रित करना और मन को भगवान की ओर लगाना।


  • दिनांक:29/10/2026 19:00 - 29/10/2026 22:43
  • स्थान

विवरण

करवा चौथ एक पारंपरिक हिंदू व्रत है जिसे मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति और परिवार के कल्याण, लंबी आयु और समृद्धि के लिए रखती हैं।

सरल शब्दों में कहें तो, यह प्रेम, प्रार्थना, आत्म-अनुशासन और प्रतिबद्धता का दिन है। उपवास महत्वपूर्ण है, लेकिन सनातन दृष्टिकोण से व्रत का गहरा उद्देश्य केवल "भोजन से वंचित रहना" नहीं है। व्रत का अर्थ है एक पवित्र संकल्प लेना —कुछ समय के लिए अपनी सामान्य इच्छाओं को नियंत्रित करना और मन को भगवान की ओर लगाना।

हम इसे क्यों मनाते हैं?

करवा पूजा के दौरान इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक मिट्टी के बर्तन को कहते हैं, जबकि चौथ का अर्थ है चौथा दिन। यह व्रत उत्तर भारत में प्रचलित पंचांग परंपरा के अनुसार कार्तिक माह के घटते चंद्रमा के चौथे चंद्र दिवस, कृष्ण पक्ष चतुर्थी को पड़ता है।

परंपरागत रूप से, विवाहित महिला व्रत रखती है और अपने पति की आयु (दीर्घायु), आरोग्य (अच्छे स्वास्थ्य), सुरक्षा और समृद्धि के लिए प्रार्थना करती है। यह वैवाहिक जीवन के सौभाग्य यानी आशीर्वाद से भी जुड़ा हुआ है।

कहानियों और रीति-रिवाजों में क्षेत्रीय भिन्नताएँ हैं। परिवार शिव-पार्वती, गणेश भगवान और कार्तिकेय की पूजा कर सकते हैं, करवा चौथ व्रत कथा सुन सकते हैं और चंद्रमा प्रकट होने पर चंद्र देव का सम्मान कर सकते हैं। इसलिए, हर हिंदू परिवार द्वारा एक ही तरह से पालन किया जाने वाला कोई एक समारोह नहीं है।