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चैत्र शुक्ल पक्ष में मनाई जाने वाली नवरात्रि, स्वयं को अनुशासन में स्थिर करने से लेकर शुद्धिकरण और दिव्य पूर्णता तक की यात्रा है। प्रत्येक दिन केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक आंतरिक रूपांतरण है।


  • दिनांक:26/03/2026 18:00 - 26/03/2026 20:00
  • स्थान 215 कार्लटन रोड, नॉटिंघम, NG3 2FX (मेप)
  • और जानकारी:नॉटिंघम का हिंदू मंदिर सांस्कृतिक और सामुदायिक केंद्र

विवरण


19 मार्च 2026 (गुरुवार)

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
माँ शैलपुत्री

यह शुरुआत है। स्थापना दिवस। माँ शैलपुत्री शक्ति, स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक हैं। वे हिमालय की पुत्री हैं - दृढ़, अविचल।

क्या करें (सनातन अभ्यास):

  • सुबह घट स्थापना (कलश स्थापना) करें।

  • देसी घी से दीया जलाएं।

  • शुद्ध घी या सफेद फूल चढ़ाएं।

  • इन नौ दिनों के लिए संकल्प (स्पष्ट इरादा) लें।

  • यदि आप उपवास रख रहे हैं, तो अपना उपवास शुरू करें।

यह दिन अनुशासन का दिन है। अगर शुरुआत अच्छी रही तो बाकी सब अपने आप हो जाएगा।


20 मार्च 2026 (शुक्रवार)

चैत्रा शुक्ला द्वितीया
माँ ब्रह्मचारिणी

वह तपस्या, भक्ति और आत्मसंयम का प्रतीक है। यह आंतरिक शक्ति है, शारीरिक शक्ति नहीं।

क्या करें:

  • अपने भोजन को सरल और सात्विक रखें।

  • ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः का जाप करें।

  • चीनी या फल दें।

  • अपनी वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखने पर ध्यान दें।

सनातन धर्म सिखाता है कि आत्म-अनुशासन के बिना कुछ भी विकसित नहीं होता।


21 मार्च 2026 (शनिवार)

चैत्र शुक्ल तृतीया
माँ चंद्रघंटा

योद्धा जैसी ऊर्जा और शालीनता का संतुलित मेल। वह भय को दूर करती है और साहस प्रदान करती है।

क्या करें:

  • दूध, खीर या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें।

  • निडरता और स्पष्टता के लिए प्रार्थना करें।

  • यदि संभव हो तो दुर्गा चालीसा पढ़ें।

शक्ति शांत होनी चाहिए, शोरगुल वाली नहीं। यही इस कहानी का मूलमंत्र है।